बद्धपद्मासन इति किम्
बद्ध पद्मासन इदं खिन्नं सुलभं कार्यं न भवति, परन्तु यदि सम्यक् अभ्यासः क्रियते तर्हि एतत् भवतः शरीराय लाभं दास्यति।
यह आसन पुरानी कब्ज के लिए बहुत प्रभावी है तथा जानुओं में गठिया के निर्माण से रोकता है।
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अर्ध मत्स्येन्द्रासन इति किम्
अर्ध मत्स्येन्द्रासन यह आसन अपने मूल रूप में अभ्यास करना कठिन है, अतः, इसका सरलीकरण किया गया जिसे 'अर्द्ध-मत्स्येन्द्रासन' कहा जाता है।
इस आसन के पर्याप्त अभ्यास के बाद मत्स्येन्द्रासन का अभ्यास करना संभव हो जाता...
अर्ध हलासन इति किम्
अर्ध हलासन यह आसन उत्तानपदासन के समान है। अन्तर केवल यह है कि, उत्तानपदासने में पादों को लगभग 30 डिग्री और अर्ध-हलासन में लगभग 90 डिग्री ले जाते हैं।
इति अपि ज्ञातव्यम्: अर्ध-हल मुद्रा, अर्ध-हल...
अर्धचन्द्रासन इति किम् २
अर्धचन्द्रासनः २ यह आसन उष्ट्रासन (The camel pose) के समान है। यह आसन अर्ध-चन्द्रासन का अपर रूप है।
इति अपि ज्ञातव्यम्: अर्धचन्द्र मुद्रा 2, अर्धचन्द्र आसन, अधा चन्दर आसन
इस आसन को कैसे प्रारम्भ करे
उष्ट्रासन...
अर्धचन्द्रासन इति किम् १
अर्धचन्द्रासनः १ अर्ध-चन्द्रासन (अर्धचन्द्र आसन) मुद्रा करने में; भवन्तः चन्द्रस्य अचेतनशक्तिं प्राप्नुवन्ति, एषा ऊर्जा चन्द्राकारस्य दैनिकचरणस्य अनुसारं परिवर्तते ।
चन्द्रः योगे अपि प्रतीकात्मकः अस्ति । प्रत्येकं व्यक्तिं स्वप्रकारेण तत् स्पृशति। इस आसन से उसे उन ऊर्जाओं...
अर्धचक्रासनम् इति किम्
अर्धचक्रासनम् चक्र अर्थात् चक्र और अर्ध अर्थात् अतः यह अर्धचक्र मुद्रा है। अर्धचक्रासनं च ऊर्ध्वधनुरासनम् ।
ऊर्ध्वोन्नितोन्नतोऽथ वा धनुर् धनुः इत्यर्थः । "चक्रमुद्रा" तथा "उन्नत धनुष मुद्रा" दोनों ही इस आसन के स्वरूप का वर्णन करते हैं।
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अर्ध भुजङ्गासन इति किम्
अर्ध भुजङ्गासन इस आसन में पैर की अंगुली से लेकर नाभि तक अपने शरीर के अधो भाग भूमि को स्पर्श करें। तलौ भूमौ स्थापयित्वा शिरः कोबरा इव उत्थापयेत् ।
कोब्रा इव आकारात् कोबरा मुद्रा उच्यते ।
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अञ्जनेयसन इति किम्
अञ्जनेयसनः अञ्जनेयसनस्य नाम महाभारतीयस्य वानरदेवस्य नामधेयम् अस्ति । इस आसन में हृदय शरीर के निचले भाग से जुड़े होता है, जिससे प्राण को नीचे और ऊपर की ओर प्रवाहित होने का अवसर मिलता है।
इति अपि...